कल यानी तीन दिसंबर की तारीख उस त्रासदी की गवाह है जिसने हजारों लोगों की जान ले ली थी और इससे कहीं ज्यादा संख्या में लोगों को एक भयावह स्मृति दे दी जो उनके जेहन से कभी न उतर सकी।
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